मोदी का यूएई दौरा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की दो-दिवसीय यात्रा कई मायनों में महत्वपूर्ण और उपयोगी मानी जा रही है। पहली बार 34 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री संसाधन समृद्ध इस अरब देष की यात्रा कर रहे हैं। 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी के बाद मोदी यूुएई की यात्रा पर जाने वाले पहले प्रधानमंत्री है। रेगिस्तान को दुनिया की खूबसूरत जगह में परिवर्तित करके और हर तरह की आधिनुक सुविधाएं और ऐषो-आराम उपलब्ध कराकर यूएई ने पूरी दुनिया में नाम कमाया है। यूएई के पास अथाह धन है और भारत को निवेष की दरकार है। प्रधानमंत्री यहां के निवेषकों को भारत में लाने के मकसद से अबू धाबी के दौरे पर गए हैं। एक और खास प्रयोजन हैः 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों के प्रमुख साजिषकर्ता माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम की बेषुमार संपत्ति को जब्त करवाना। दुबई में दाऊद का अच्च्छा खासा कारोबार है और भारत द्वारा इष्ताहरी मुजरिम घोशित किए जाने के बावजूद यूएई में उसकी संपति अब तक जब्त नहीं की गई है। मई 2013 से भारत और यूएई के बीच प्रत्यपर्ण (एक्सट्राडिषन) संधि है। दाऊद इब्राहिम जैसे भगोडै अपराधी को गिरफ्तार करने के मकसद से यह संधि की गई है। इस संधि के बाद से दाऊद को यूएई से भी भागना पडा है और अब वह पाकिस्तान में छिपा हुआ है हालंाकि केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री हरिभाई चौधरी ने बजट सत्र में संसद को बताया था कि दाऊद कहां छिपा है, भारत सरकार को इस बात की कोई जानकारी नहीं है। प्रधानमंत्री यूएई सरकार से भगौडे अपराधी दाऊद इब्राहिम की संपति जब्त करने के लिए कहेंगें। प्रधानमंत्री ने यात्रा के पहले दिन अबू धाबी की मशहूर शेख जायद मस्जिद जाकर पूरी दुनिया को चौका दिया है। मक्का और मदीना के बाद यह दुनिया की तीसरी भव्य मस्जिद है। इस मस्जिद की भव्यता बेमिसाल है और मोदी भी इससे अभिभूत हो गए। इस मस्जिद को बनाने में 12 (1996-2007) साल लगे गए। 13 देशों के लगभग 3 हजार कारीगरों ने इस मस्जिद का निर्माण किया था। मस्जिद के भीतर मोदी के पक्ष में नारे लगना बहुत बडी बात है। दुनिया भर के मुस्लिम जगत में नरेन्द्र मोदी को खालिस “हिन्दु“ माना जाता है। 2011 में अहमदाबाद के एक समारोह में मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए “मुस्लिम“ टोपी पहनने से इंकार कर दिया था। तब मोदी के इस फैसले की जमकर आलोचना हुई थी और मुस्लिम समुदाय इस बात से खासा नाराज हुआ था। कांग्रेस के बडबोले नेता दिग्विजय सिंह ने मोदी की इस पहल पर चुटकी भी ली है। सोमवार को अबू धाबी निवेश प्राधिकरण (अबू धाबी इंवेस्टमेंट ऑथॉरिटी-एडीआईए) प्रधानमंत्री के लिए विशुद्ध शाकाहारी रात्रि भोज का आयोजन कर रहा है। इस भोज के लिए नामचीन शैफ संजीव कपूर को विशेष तौर पर अबू धाबी बुलाया गया है। एडीआईए दुनिया की दूसरी सबसे बडी समृद्ध वित्तीय सस्था है। इसके पास तेल उत्पादक देशों के लगभग 800 अरब डॉलर पडे हैं। भारत को इंफरास्ट्रक्चर प्रोजेक्टस के लिए विशाल निवेश की दरकार है और एडीआईए इसमें भारत की मदद कर सकता है,। प्रधानमंत्री के लिए आयोजित रात्रि भोज इस सिलसिले में काफी उपयोगी साबित हो सकता है। प्रधानमंत्री ने खुद माना है कि यूएई की मदद के बगैर एशिया में तेजी से प्रगति मुमकिन नहीं है। यूएई के पास अपार पूंजी है और भारत के पास अपार क्षमताएं। दोनों मिल जाएं दो एशिया का नकशा बदल सकता है। यूएई में भारतीय मूल के लोगों का अमूल्य योगदान है और यहां के 20 शीर्ष अरबपतियों में 5 भारतीय मूल के लोग हैं। गल्फ कोपरेषन काउंसिल (जीसीसी) द्वारा जारी आंकडों के अनुसार खाडी देशों के 50 सबसे अमीर लोगों में 10 भारतीय हैं। प्रधानमंत्री ने सोमवार को भारतीय मूल के लोगों को स्वदेश में निवेश करने का न्यौता भी दिया। यूएई में भारतीय श्रमिकों से जुडी कुछ समस्याएं भी है। लगभग 26 लाख भारतीय यूएई में काम करते हैं और इनमेंसे 60 प्रतिशत कामगार हैं। रविवार को प्रधानमंत्री ने अबू धाबी में भारतीय श्रमिकों के शिविर का दौरा भी किया और कामगारों से मिलकर उनकी समस्याओं से रू-ब-रू हुए। भारतीय श्रमिकों के लिए यह बहुत बडी बात थी। पहली बार देश का प्रधानमंत्री विदेश में अपने श्रमिकों से मिला। यूएई के आलीशान एवं भव्य निर्माण में भारतीय श्रमिकों की अहम भूमिका रहती है मगर यहां वेतन महंगाई (कास्ट अॅाफ लीविंग) की तुलना में काफी कम है। पिछले साल नवंबर से भारत सरकार यूएई से यह मामला उठा रही है। 34 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री के दौरे से निवेश कों और भारतीय मूल के लोगों को काफी उम्मीदें है। प्रधानमंत्री के दौरे से भारत और यूएई कि बीच द्धिपक्षीय संबंधों का नया दौर शुरु हो सकता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की दो-दिवसीय यात्रा कई मायनों में महत्वपूर्ण और उपयोगी मानी जा रही है। पहली बार 34 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री संसाधन समृद्ध इस अरब देष की यात्रा कर रहे हैं। 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी के बाद मोदी यूुएई की यात्रा पर जाने वाले पहले प्रधानमंत्री है। रेगिस्तान को दुनिया की खूबसूरत जगह में परिवर्तित करके और हर तरह की आधिनुक सुविधाएं और ऐषो-आराम उपलब्ध कराकर यूएई ने पूरी दुनिया में नाम कमाया है। यूएई के पास अथाह धन है और भारत को निवेष की दरकार है। प्रधानमंत्री यहां के निवेषकों को भारत में लाने के मकसद से अबू धाबी के दौरे पर गए हैं। एक और खास प्रयोजन हैः 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों के प्रमुख साजिषकर्ता माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम की बेषुमार संपत्ति को जब्त करवाना। दुबई में दाऊद का अच्च्छा खासा कारोबार है और भारत द्वारा इष्ताहरी मुजरिम घोशित किए जाने के बावजूद यूएई में उसकी संपति अब तक जब्त नहीं की गई है। मई 2013 से भारत और यूएई के बीच प्रत्यपर्ण (एक्सट्राडिषन) संधि है। दाऊद इब्राहिम जैसे भगोडै अपराधी को गिरफ्तार करने के मकसद से यह संधि की गई है। इस संधि के बाद से दाऊद को यूएई से भी भागना पडा है और अब वह पाकिस्तान में छिपा हुआ है हालंाकि केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री हरिभाई चौधरी ने बजट सत्र में संसद को बताया था कि दाऊद कहां छिपा है, भारत सरकार को इस बात की कोई जानकारी नहीं है। प्रधानमंत्री यूएई सरकार से भगौडे अपराधी दाऊद इब्राहिम की संपति जब्त करने के लिए कहेंगें। प्रधानमंत्री ने यात्रा के पहले दिन अबू धाबी की मशहूर शेख जायद मस्जिद जाकर पूरी दुनिया को चौका दिया है। मक्का और मदीना के बाद यह दुनिया की तीसरी भव्य मस्जिद है। इस मस्जिद की भव्यता बेमिसाल है और मोदी भी इससे अभिभूत हो गए। इस मस्जिद को बनाने में 12 (1996-2007) साल लगे गए। 13 देशों के लगभग 3 हजार कारीगरों ने इस मस्जिद का निर्माण किया था। मस्जिद के भीतर मोदी के पक्ष में नारे लगना बहुत बडी बात है। दुनिया भर के मुस्लिम जगत में नरेन्द्र मोदी को खालिस “हिन्दु“ माना जाता है। 2011 में अहमदाबाद के एक समारोह में मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए “मुस्लिम“ टोपी पहनने से इंकार कर दिया था। तब मोदी के इस फैसले की जमकर आलोचना हुई थी और मुस्लिम समुदाय इस बात से खासा नाराज हुआ था। कांग्रेस के बडबोले नेता दिग्विजय सिंह ने मोदी की इस पहल पर चुटकी भी ली है। सोमवार को अबू धाबी निवेश प्राधिकरण (अबू धाबी इंवेस्टमेंट ऑथॉरिटी-एडीआईए) प्रधानमंत्री के लिए विशुद्ध शाकाहारी रात्रि भोज का आयोजन कर रहा है। इस भोज के लिए नामचीन शैफ संजीव कपूर को विशेष तौर पर अबू धाबी बुलाया गया है। एडीआईए दुनिया की दूसरी सबसे बडी समृद्ध वित्तीय सस्था है। इसके पास तेल उत्पादक देशों के लगभग 800 अरब डॉलर पडे हैं। भारत को इंफरास्ट्रक्चर प्रोजेक्टस के लिए विशाल निवेश की दरकार है और एडीआईए इसमें भारत की मदद कर सकता है,। प्रधानमंत्री के लिए आयोजित रात्रि भोज इस सिलसिले में काफी उपयोगी साबित हो सकता है। प्रधानमंत्री ने खुद माना है कि यूएई की मदद के बगैर एशिया में तेजी से प्रगति मुमकिन नहीं है। यूएई के पास अपार पूंजी है और भारत के पास अपार क्षमताएं। दोनों मिल जाएं दो एशिया का नकशा बदल सकता है। यूएई में भारतीय मूल के लोगों का अमूल्य योगदान है और यहां के 20 शीर्ष अरबपतियों में 5 भारतीय मूल के लोग हैं। गल्फ कोपरेषन काउंसिल (जीसीसी) द्वारा जारी आंकडों के अनुसार खाडी देशों के 50 सबसे अमीर लोगों में 10 भारतीय हैं। प्रधानमंत्री ने सोमवार को भारतीय मूल के लोगों को स्वदेश में निवेश करने का न्यौता भी दिया। यूएई में भारतीय श्रमिकों से जुडी कुछ समस्याएं भी है। लगभग 26 लाख भारतीय यूएई में काम करते हैं और इनमेंसे 60 प्रतिशत कामगार हैं। रविवार को प्रधानमंत्री ने अबू धाबी में भारतीय श्रमिकों के शिविर का दौरा भी किया और कामगारों से मिलकर उनकी समस्याओं से रू-ब-रू हुए। भारतीय श्रमिकों के लिए यह बहुत बडी बात थी। पहली बार देश का प्रधानमंत्री विदेश में अपने श्रमिकों से मिला। यूएई के आलीशान एवं भव्य निर्माण में भारतीय श्रमिकों की अहम भूमिका रहती है मगर यहां वेतन महंगाई (कास्ट अॅाफ लीविंग) की तुलना में काफी कम है। पिछले साल नवंबर से भारत सरकार यूएई से यह मामला उठा रही है। 34 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री के दौरे से निवेश कों और भारतीय मूल के लोगों को काफी उम्मीदें है। प्रधानमंत्री के दौरे से भारत और यूएई कि बीच द्धिपक्षीय संबंधों का नया दौर शुरु हो सकता है।






