भारत और पाकिस्तान के बीच 23 अगस्त को प्रस्तावित शांति वार्ता से पहले के माहौल को देखकर लगता है जैसे कोई दंगल लडा जाने वाला है। पाकिस्तान माहौल को बिगाडने की हर संभव कोषिष कर रहा है। सीमा पर युद्ध विराम का लगातार उल्लघंन किया जा रहा है। बस्तियों पर गोला-बारुद फेंककर निर्दोष लोगों को मारा जा रहा है। कष्मीर विवाद उछालने के लिए इस्लामाबद में 30 सितंबर से षुरु होने वाली कॉमन वैल्थ पार्लियामेंट काँफ्रेंस को टाल दिया गया है। इस काँफ्रेंस को इसलिए टाला गया क्योंकि पाकिस्तान नहीं चाहता था कि जम्मू-कश्मीर प्रतिनिधि इसमें हिस्सा लें। इससे पाकिस्तान की नाक कट जाती। और अब भारत के जले पर नमक छिडकने के लिए पाकिस्तान के उच्चायुक्त ने 23 अगस्त को कश्मीर के अलगाववादी नेताओं को राश्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज के साथ वार्ता के लिए बुलाया है। शुक्रवार को भारत ने पाकिस्तान को इस मीटिंग को रद्द करने को कहा मगर पाकिस्तान ने साफ कह दिया कि वह भारत के इशारों पर नहीं चलेगा। इस स्थिति में यह वार्ता होगी भी, इस पर भी संदेह है। पिछले साल 2014 में भारत ने पाकिस्तान के साथ शांति वार्ता इसी विवादास्पद मुद्दे पर स्थगित कर दी थी। तब भी पाकिस्तान ने शांति वार्ता के दौरान कष्मीर के अलगाववादी नेताओं को दिल्ली बुलाया था और इससे खफा भारत ने वार्ता ही स्थगित कर दी थी। पाकिस्तान के रवैए से साफ है कि उसे भारत के साथ षांति वार्ता में कोई रुचि नहीं है। दुनिया को दिखाने के लिए पाकिस्तान शांतिवार्ता का नाटक करता है। पाकिस्तान यह बात भली.भांति जानता है कि तनावपूर्ण माहौल में वार्ता हो ही नहीं सकती। और अगर जैसे.तैसे वार्ता होती भी है तो पाकिस्तान कश्मीर का मुद्दा उछालकर वार्ता को अशांत कर देगा। मौजूदा स्थिति साफ.साफ संकेत दे रही है कि पाकिस्तान, भारत के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाना ही नहीं चाहता और उसकी रुचि तनाव बढाने में ज्यादा है। चीन के साथ दोस्ती बढने के बाद पाकिस्तान के रवैए में काफी बदलाव आया है। चीन अब पाकिस्तान का 'ऑल वेअथॅर फ्रेंड' है। एक जमाने में अमेरिका को यह श्रेय जाता था। इस क्रम में चीन ने अमेरिका को पीछे धकेल दिया है। अमेरिका अब पकिस्तान का 'बॉय फ्रेंड' ही रह गया है। चीन का नेतृत्व बेहद काइयां है और वह अपनी कूटनीति चालें बडी सफाई से चलता है। भारत के खिलाफ उसकी कई चालें सफल रही है। सीमा पर नियंत्रण रेखा आज तक निर्धारित नहीं हो पाईं है और न ही सीमा विवाद हल हो पाया है। अरुणाचल प्रदेष से लेकर हिमाचल प्रदेश तक के विशा ल भारतीय क्षेत्र को चीन अपना बताता है। अकसाई चीन को विष्व मैप पर चीनी क्षेत्र दिखाने में वह कामयाब हो गया है। पहले पश्चिम देश इस क्षेत्र को विवादित मानते थे मगर चीन ने बडी चतुराई से वल्र्ड मेप में इसे अपना क्षेत्र बताकर दुनिया को गुमराह किया है। पाकिस्तान में गिलगिट-बालिस्तान (जीबी) और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सडकों और पुलों का जाल बिछाकर वह भारत को घेरना चाहता है। चीन ने हाल ही में पाकिस्तान के साथ कश्मीर ;पाक अधिकृत और गिलगिट बालिस्तान होते हुए चीन के सिंकियांग में कस्गर से ग्वादर.बलोचिस्तान कारीडार के लिए 46 अरब डॉलर का करार किया है। सामरिक दृष्टि से यह भारत के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। चीन एक ओर पाकिस्तान और दूसरी ओर नेपाल से दोस्ती बढाकर भारत को घेर रहा है। पूवर्ोत्तर में म्यांमार के रास्ते चीन ने भारत को घेर रखा है। इन सब बातों के दृश्टिगत पाकिस्तानए भारत से दोस्ती चाहता ही नहीं है। पाकिस्तान 1971 का अपमान नहीं भूला है और भारत से बदला लेने की फिराक में है। इन हालात में पाकिस्तान से षांति वार्ता की कोई प्रासंगिकता नहीं रह जाती है।
शनिवार, 22 अगस्त 2015
India-Pakistan: Not a Peace Talks But a Wrestling Bout
Posted on 11:50 am by mnfaindia.blogspot.com/






