गुरुवार, 13 अगस्त 2015

Congress Responsible For Delay in GST

        जीएसटी में विलंब को कांग्रेस दोषी


संसद के मौजूदा सत्र में भी चिर-प्रतीक्षित गुडस एंड सर्विसिस बिल पारित होने की कोई उम्मीद नहीं रह गई है। पूरा सप्ताह का सत्र  हंगामे की भेंट चढ गया है। वीरवार (13 अगस्त) मौजूदा सत्र का आखिरी दिन है। ललितगेट मामले में विदेष मंत्री सुषमा  स्वराज, राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और व्यापमं में फंसे मध्य प्रदेश  के मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे पर अडी कांग्रेस जीएसटी बिल को राज्यसभा में पारित नहीं होने देने पर आमादा है। बुधवार को भी कांग्रेस ने ललितगेट पर संसद के दोनों सदनों में भारी हंगामा किया। लोकसभा  जीएसटी बिल को पहले ही पारित कर चुकी है मगर राज्यसभा द्वारा इस बिल को अपनी स्वीकृति देना बाकी है। मंगलवार को कांग्रेस सदस्यों के भारी हंगामे के बीच  वित्त मंत्री ने  राज्यसभा में जीएसटी बिल पेश  किया मगर चर्चा  नहीं हो सकी। बुधवार को भी कांग्रेस ने राज्यसभा में बिल पर चर्चा नहीं होने दी और भारी शोरगुल के कारण सभापति को वीरवार तक सदन की बैठक स्थगित करनी पडी। जीएसटी बिल को राज्यसभा में पारित करने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत की दरकार है। मोदी सरकार के पास इतना बहुमत नहीं है। जीएसटी संविधान संशोधन बिल है। अगर यह बिल मौजूदा सत्र में पारित नहीं होता है तो अप्रैल, 2016 से  एकसमान (यूनिफॉर्म) गुडस एंड  सर्विसिस  टैक्स का लगना मुमकिन नहीं हो पाएगा। गुडस एंड सर्विसिस टैक्स चूंकि समवर्ती सूची का मामला है, लिहाजा इस बिल को कम-से-कम आधी विधानसभाओं द्वारा पारित करना भी अनिवार्य  है। यह मामला पिछले कई सालों से लटका पडा है और इससे उधोग, वाणिज्य और व्यापारियों को खासा नुकसान हो रहा है।  उधोग और वाणिज्य जगत जीएसटी को जल्द से जल्द लागू करने के पक्ष में है। इसी बात के दृश्टिगत  एक महत्वपूर्ण  घटनाक्रम में देश के अग्रणी उधोगपतियों ने  बीस हजार हस्ताक्षर युक्त  ज्ञापन के माध्यम से सांसदों से इस बिल को पारित करने का आग्रह किया है। उधोग -वाणिज्य जगत का आकलन है कि केन्द्र और राज्यों द्वारा तरह-तरह के कर लगाए जाने से उधोग  और व्यापारियों को खामख्वाह दोगुना अथवा तिगुना कर चुकाना पड रहा है। कई उत्पादों पर केन्द्र और संबंधित राज्य द्वारा कर-दर-कर लगाए जाते हैं। इस कर व्यवस्था से कर चोरी को तो बढावा मिलता ही है, सरकार को भी राजस्व का नुकसान उठाना पडता रहा है ।  जीएसटी के लागू होने से पूरे देश  में एकसमान कर व्यवस्था लागू होगी। इसमें केन्द्रीय आबकारी, राज्य बिक्री कर, चुंगी जैसे सभी करों का समावेश  होगा। महाराष्ट्र , गुजरात  और तमिल नाडु जैसे औद्योगिकृत राज्यों को आशंका है कि एकसमान कर लागू  होने से उन्हें नुकसान हो सकता है। इसकी वजह यह है कि मौजूदा  व्यवस्था (वैट) मूल उत्पादन (ओरिजिन)  पर कर लगाती है मगर जीएसटी से डेस्टिनेषन पर कर लगेगा। यानी जिस जगह उत्पादन हो रहा है, वहां कर नहीं लगेगा, अलबत्त्ता कर उस जगह लगेगा, जहां उत्पाद बेचा जाएगा। इस स्थिति में जाहिर है औद्योगिकृत राज्यों को राजस्व का अच्छा-खासा नुकसान होगा। इसी आशंका के चलते तमिल नाडु की मुख्यमंत्री जयललिता जीएसटी बिल का मुखर विरोध कर रही हैं। बहरहाल, पांच साल तक केन्द्र इन राज्यों के राजस्व नुकसान की भरपाई करेगा।  विशेषज्ञों का आकलन है कि देश  में एक समान कर व्यवस्था लागू होने पर सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) में लगभग दो प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है और  भारतीय अर्थव्यवस्था पांच साल में डबल डिजीट ग्रोथ का लक्ष्य हासिल कर सकती है। कांग्रेस को इन सब बातों से कोई सरोकार नहीं है। लोकसभा चुनाव में करारी हार से पस्त कांग्रेस को लगता है कि जिस तरह उसने भूमि अधिग्रहण बिल पर मोदी सरकार को झुकाया है, उसी तरह जीएसटी बिल पर भी सरकार को चित कर सकती है। सरकार के पास अभी भी विकल्प है। वह संसद का संयुक्त सत्र बुलाकर जीएसटी बिल को पारित कर सकती है।