रविवार, 13 नवंबर 2016

स्टॉक मार्केट्स में भूचाल?

             
रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार एवं खरबपति कारोबारी डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति निर्वाचित होते ही दुनिया भर की स्टॉक मार्केटस में भूचाल सा आ गया है। भारतीय स्टॉक मार्केट को इस सप्ताह दो बडी घटनाओं ने हलकान कर रखा है। “सेक्सी“, “जातिवादी“, “घमंडी“ और “कर चोर“ डोनाल्ड ट्रंप का अमेरिकी राष्ट्रपति चुना जाना दुनिया तो क्या, खुद अमेरिकी पचा नहीं पा रहे हैं और जगह-जगह उनके खिलाफ प्रदर्शन  हो रहे हैं।  मोदी सरकार द्वारा 8 नवंबर को अचानक 500 रु और 1000 रु के नोट बंद किए जाने से पूरे देश  में अफरा-तफरी फैली मची हुई है। भारतीय स्टॉक मार्केट भी इसे अछूता नही रहा। शुक्रवार को बीएसई सूचकांक में इस साल की दूसरी सबसे बडी 699 अंकों की गिरावट आई। भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले 67 पैसे कमजोर हुआ और तीन माह के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार को सेंसेक्स बाजार खुलते ही 1700 अंक लुढक कर सत्र के अंत में जैसे-तैसे  1350 अंक सुधरा। मगर मार्केट अभी भी नए अमेरिकी राष्ट्रपति की संभावित ऊंचे ब्याज दर की नीति से संशक्ति है और इसलिए बिकवाली का दबदबा बना हुआ है। अमेरिकी सैट्रल बैंक फेडेरल रिजर्व  ने दिसंबर में ब्याज दरें बढाने का संकेत देकर आग में घी डालने का काम किया है। पूरी दुनिया को इस बात का डर सता रहा है कि अगर अमेरिकी में ब्याज दरें बढती हैं, तो संस्थागत निवेशक एमरजिंग मार्केटस को छोडकर अमेरिका पलायन कर जाएंगे। इस साल अब तक विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भारतीय स्टॉक मार्केटस में 45, 000 करोड रु का निवेश  कर चुके हैं और इसी वजह भारतीय स्टॉक मार्केट में तेजी बनी रही । भारतीय स्टॉक मार्केट में विदेशी संस्थागत निवेशकों का दबदबा रहता है। स्टॉक मार्केटस में 80 फीसदी कारोबार  विदेशी  संस्थागत निवेशक करते है। इस स्थिति में अगर  विदेशी  संस्थागत निवेशक अमेरिका की ओर रुख करते हैं, तो बाजार में अफरा-तफरा मच सकती है। अमेरिका में अभी ब्याज निम्नतम स्तर पर है, इसलिए निवेशक एमरजिंग मार्केटस की ओर आकर्षित  होते हैं जहा ब्याज दरें काफी ऊंची है। मगर जैसे ही अमेरिका में ब्याज दरें बढेंगी,  विदेशी  संस्थागत निवेशक एमरजिंग मार्केटस छोड कर वहां चले जाएंगें। शुक्रवार को इसके संकेत भी मिले। एक ओर जहां जापान के निक्की को छोडकर अधिकतर एमरजिंग एवं एशिया  शेयरों में गिरावट आई, वही अमेरिकी और यूरोप के स्टॉक में सुधार आया।  300 यूरोपियन शेयरों के सूचकांक में अगर उछाल नही आया तो गिरावट भी नहीं आई। यह स्थिर बना रहा। ताजा हालात में यह बडी बात है।   अमेरिका का डाउ जोन्स वीरवार को रिकॉर्ड  उच्च स्तर पर बंद हुआ। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मंझे हुए कारोबारी हैं और उन्होंने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फिर से बुलंदियों पर ले जाने का वायदा कर रखा है। उनके इसी संकल्प के  दृष्टिगत  एमरजिंग मार्केट्स  को लग रहा है कि ट्रंप निवशकों को  आकर्षित करने के लिए ऊंची ब्याज दरें एव  मुद्रा-स्फीति वाली नीतियां अपना सकते है। एमरजिंग मार्केटस इसी आशं का से सहमे हुए हैं । सबसे बुरी हालत मेक्सिको की मुद्रा पीसो की है। ट्रंप की जीत के बाद पीसो में 10 फीसदी की गिरावट दर्ज  हुई है। ट्रंप ने अमेरिका-मेक्सिको की सीमा को बंद करने की धमकी दे रखी है। बहरहाल, एमरजिंग मार्केट्स के लिए  यह स्थिति थोडी राहत वाली हो सकती है कि अमेरिकी स्टॉक 80 फीसदी ओवरवेल्यूड है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इन हालात में 2017 में अमेरिकी स्टॉक मार्केट क्रेश  कर सकती है। नामी अर्थशास्त्री जिम रोजर्स  का आकलन है कि “ अमेरिका 68 खरब डॉलर वित्तीय पतन के मुहाने पर खडा है। और अगर ऐसा हुआ तो लाखों अमेरिकी सडक पर आ जाएंगें। यह स्थिति अमेरिका के लिए ही नहीं पूरी दुनिया में वित्तीय तबाही ला सकती है। अमेरिका दुनिया का हवलदार है। उसे छींक भी आ जाए तो दुनिया को जुकाम हो जाता है। इसी तरह की आशंकाएं दुनिया को भयभीत किए हुए है। स्टॉक मार्केट्स में व्याप्त अफरा-तफरी में इसकी झलक देखी जा सकती है।